जीत की हुंकार भरने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी गर्दिश में



लोकसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और 2014 की ही तरह एक बार फिर देश भर में मोदी लहर देखने को मिली है। राजधानी दिल्ली की भी राजनीति इस बार खास रही और लगातार जीत की हुंकार भरने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी गर्दिश में चली गई। राजधानी दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा और 2015 विधानसभा में 70 में से 67 सीट जीतकर सत्ता में आनेवाली आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सात सीटों में से सिर्फ दो पर ही दूसरे स्थान पर रहे जबकि एक सीट पर अपनी जमानत भी जब्त करवा बैठे। विधानसभा के हिसाब से बात करे तो 70 में से 65 सीटें ऐसी रहीं जहां भाजपा का दबदबा देखने को मिला वहीं पांच सीटों पर कांग्रेस आगे रही। यह पांच सीट मुस्लिम बहुल इलाका है। यह बात करना इसलिए लाजमी हो जाता है क्योंकि 2020 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और यह आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं।


मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विधानसभा क्षेत्र में इनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। आप के बड़े नेता कैलाश गहलोत, राजेंद्र पाल गौतम, गोपाल राय, इमरान हुसैन और सौरभ भारद्वाज के भी विधानसभा क्षेत्र में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही वहीं मनीष सिषोदिया, सतयेंद्र जैन और राखी बिड़ला के क्षेत्र में इनकी पार्टी दूसरे नंबर पर रही। चुनाव से पहले जिस गठबंधन के लिए केजरीवाल ने तमाम कोशिशें कीं, वह सफल भी रहता तो दिल्ली में भाजपा की सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को 56.6 फीसदी, कांग्रेस को 22.5 फीसदी और आप को 18.1 फीसदी वोट मिले। इस हार के बाद केजरीवाल खेमे की बेचैनी बढ़ी हुई है क्योंकि अगले साल पार्टी को विधानसभा चुनाव में जाना है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने किसी भी संभावित गठबंधन से इनकार करते हुए हार के समीक्षा की बात कही। पार्टी के गोपाल राय ने कहा कि भले ही लोगों ने केंद्र के लिए मोदी को पसंद किया है पर दिल्ली में केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग आप को एक मॉडल पार्टी के रूप में देखते हैं और हम आगे की रणनीति बनाने में लगे हुए हैं।